Tanhai - Hamida

फिर कोई आया दिल-ऐ-ज़ार !
नहीं कोई नहीं
राहरू होगा कहीं और चला जाएगा
ढल चुकी रात, बिखरने लगा तारों का ग़ुबार
लड़खडाने लगे ऐवानों में ख़्वाबीदा चिराग

ढल चुकी रात बिखरने लगा तारों का ग़ुबार
लड़खडाने लगे ऐवानों में ख़्वाबीदा चिराग

सो गई रास्ता तक-तक के हर इक राह्गुज़ार
सो गई रास्ता तक-तक के हर इक राह्गुज़ार
अजनबी ख़ाक ने धुंदला दिए क़दमों के सुराग़
गुल करो शम्में, बढ़ा दो मय-ओ-मीना-ओ-अयाग़
अपने बेख़्वाब किवाड़ों को मुक़फ़्फ़िल कर लो
अब यहाँ कोई नहीं, कोई नहीं आएगा
फिर कोई आया दिल-ऐ-ज़ार !

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